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बीसवीं सदी की हिंदी कथा-यात्रा (खंड 4)

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बीसवीं सदी की हिंदी कथा-यात्रा (खंड 4)

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चयन एवं संपादन : कमलेश्वर
सहायक : गायत्री कमलेश्वर

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Description

पुरानी और नई कहानी के बीच बदलाव का बिंदु वैचारिक दृष्टि का है। कथ्य के कोण से कहानियाँ बदली हैं और कथ्य के प्रति दृष्टिकोण या जीवन दृष्टि का अपना योगदान है।
नई कहानी ने जड़ता से अपने को अलग किया, बल्कि इस जड़ता से अलग जो कहानियाँ लिखी गईं, वे ‘नई’ के नाम से, अभिहित र्हुइं। नई कहानी ने जीवन की सारी संगतियों-विसंगतियों, जटिलताओं और दबावों को महसूस किया….यानी नई कहानी पहले और मूलरूप मंे जीवनानुभव है, उसके बाद कहानी है। रास्ता जीवन से साहित्य की ओर हुआ। इसीलिए उसने अनुभूति की प्रामाणिकता को रचना-प्रक्रिया का मूल अंश माना। उसने जीवन को उसकी समग्रता में रूपायित किया-व्यक्ति को भी उसके यथार्थ परिवेश में अन्वेषित किया।
बहुसम्मानित एवं समादृत कमलेश्वर हिंदी के प्रख्यात लेखक थे।
प्रतिष्ठित कथाकार गायत्री कमलेश्वर ने इस पुस्तक के संपादन में सहयोग किया है।

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